कलयुग में जीवन जीने का तरीका कैसा हो ?

कलयुग में जीवन जीने का तरीका कैसा हो ?

कलयुग में जीवन जीने का तरीका

इस लेख में हम आपको इस वर्तमान युग में या कलयुग में जीवन जीने का तरीका कैसा हो ? या होना चाहिए, इस पर आपको इस लेख के माध्यम से बताने और समझाने की पूरी कोशिश करेंगे। जैसा कि हम जानते हैं कि आज हमारी लाइफ जैसी हो गई है या हमने बना ली है।  क्या वो सही है ? और अगर वो सही है, तो हम परेशांन  क्यों है ?  और यदि हम परेशान हैं तो इसका मतलब जरूर हम कुछ तो गलत कर रहे हैं।  कुछ ऐसा हम कर रहे हैं, जो हमारी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। अगर हम चाहते हैं की शारीरिक व मानसिक  रूप से स्वास्थ्य हो, तंदुरुस्त हो, चुस्त हो।  तो हमें अपनी आदतों के बारे में जानकर  कुछ बदलाओ करने होंगे और कुछ नियमों को अपनाना होगा।  आइये हम पहले अपनी उन आदतों के बारे में जाने जो हमें बदलनी हैं।  तो अपने साथ एक कॉपी और पेन जरूर ले कर बैठे, जिससे की आप अपना स्वयं का आकलन कर सके। 

कलयुग में जीवन जीने का तरीका कैसा है ?

आज हमने अपनी जीवन दिनचर्या बिल्कुल बदल ली है। जिसका परिणाम है मोटापा, डिप्रेशन, एंग्जायटी, हार्ट प्रोब्लेम्स, और भी कई सारी प्रोब्लेम्स। इस बदलती दुनिया के साथ ऐसा क्या बदलव हमारे जीवन में आया है, आइये जानते हैं की वो क्या बदलव हैं :--

१ रात को देर से सोना और सुबह देर तक सोना। 
२ अपना ज्यादा समय विस्तार पर ही रहना। 
३ अपने रोज मर्रा के काम भी विस्तार पर करना। 
४ विस्तार पर लेट कर टी.वी. देखना या कोई किताब पढ़ना। 
५ विस्तार पर ही खाना खाना। 
६ नींद न आने के पहले ही विस्तार पर चले जाना। 
७ सुबह उठाने के बाद भी विस्तार पर ही लेटे रहना और भी कई सारी बुरी आदते हैं।  जिनके वजहा से हम कई सारी बिमारियों केे शिकार बनते जा रहे हैं। ये सभी बीमारियां हम अपने साथ नहीं ले कर आये थे।  इन सभी बिमारियों को तो हमने अतिथि के रूप में खुद ही निमंत्रण दिया है। 

कलयुग में जीवन जीने का तरीका कैसा हो ?

अगर हम शारीरिक और मानसिक रूप से स्वास्थ्य और निरोगी रहना चाहते हैं, तो जीवन जीने के तारीखों में कुछ बदलाब बहुत जरुरी हैं, जैसे ;
१ जल्दी सोना और सुबह जल्दी उठना,
२ कोई भी काम विस्तार पर नहीं करना चाहिए,
३ कभी भी विस्तार पर लेट कर टीवी या फ़ोन नहीं देखना चाहिए,
४ विस्तार पर बैठ कर खाना नहीं खाना चाहिए,
५ विस्तार पर बैठ कर कोई भी किताब नहीं पढ़नी चाहिए, 
६ विस्तार पर नींद आने से पहले नहीं जाना चाहिए,
७ और सबसे महत्वपूर्ण बात अपने सभी काम समय पर करना चाहिए। 

हम मोटे तोर पर देखे तो शरीर, मष्तिष्क  और मन का मिश्रण है।  हमारा मन बहुत ही चंचल और आराम पसंद है, इस शरीर को हम जितना आराम देते हैं मन को बहुत अच्छा लगता है।  धीरे-धीरे हम कब आलसी और रोगी हो जाते है, कब शारीरिक और मानसिक बीमारियां इस शरीर को रोग का घर बना लेती हैं, हमे पता भी नहीं चलता।  

हम जब बहुत अधिक समय अपने विस्तार पर गुजारने लगते हैं, तब हमारे शरीर को ये लगने लगता है है कि विस्तार सिर्फ सोने के लिए नहीं है, इस पर और भी काम किये जाते हैं। और फिर जब हम सोना चाहते है तो नींद नहीं आती। क्योकि  हमारा शरीर ये डिफ्रेंटिएट या  भेद नहीं कर पता की हम इस विस्तार पर अभी क्यों हैं। और बहुत देर तक इधर उधर करवटें बदलते रहने के बाद देर रात तक नींद न आने की वजह से जो शरीर का अपना महत्वपूर्ण काम था, दिन भर की थकान और टूट-फुट को ठीक करना।  ठीक समय नींद न आने की वजह से शरीर की वो प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती और हम शरीर में आलस्य, दर्द, लौ एनर्जी, मनोबल में कमी, चिड़चिड़ापन और भी बहुत सारी समस्याओ का सामना करना पड़ता है। और हम समझ नहीं पाते ऐसा क्यों हो रहा है। 

कलयुग में जीवन जीने का तरीका और कुछ सुधारात्मक उपाय और उनका  प्राभव

A girl with full of energy
कुछ सुधारात्मक उपाय और उन से मिलने वाले मानसिक और शारीरक लाभ:

१ सोने से पहले अपने साथ हुई अच्छी बातों को याद करना चाहिए। दुसरो को उनकी गलती के लिए माफ़ करना चाहिए। और हो सके तो सोने से पहले १० मिनटों के लिए ध्यान करना चाहिए।  इससे हमारा मन शांत होगा।  हमारे मन में नाकारत्मक विचार काम होंगे। हमारी नींद अच्छी और गहरी होगी और हम बहुत जल्दी ही सो सकेंगे। 

सुबह उठकर इस  जीवन और जो कुछ आपके पास  है उसके लिए उस प्रकृति का धन्यावाद करना चाहिए।  ऐसा करने से हम प्रकृति के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जिससे हमारे  शरीर में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे हमारा पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ रहता है, और हम खुश रहते हैं। 

३ खुदको या  दुसरो को नेगेटिव या गलत नहीं बोलना चाहिए। इससे हम जाने अनजाने में ही सही, अपनी ओर नेगेटिव ऊर्जा, बुरी आदतों, और बुरी मानसिकता को आकर्षित कर रहे हैं। जो कि हमारे शरीर में मानसिक और शारीरक रोगो को उत्पन्न करती है।   

खाना खाने का टाइम निश्चित रखे, टाइम चूक जाने पर खाना न खाये। जब हम एक निश्चित समय पर खाना खाते हैं तो हमारे शरीर में उस खाने को पचाने के लिए उचित मात्रा में रसायनिक तरल पदार्थ बनते हैं, जो हमारे खाने को पचाने में मदद करते हैं। कभी भी खाना खाने से वो पदार्थ सही मात्रा में नहीं बनते। जिससे हमारा खाया हुआ भोजन ठीक से पच नहीं पाता। जिसकी वजह से हमें कई प्रकार की पेट से समन्धित बिमारियाँ हो जाती हैं। जो बाद में कई और बिमारियों को जन्म देती हैं। 

५ खाना दिन में ३ बार से ज्यादा नहीं खाना चाहिए।  जब हम बार-बार कुछ न कुछ कहते रहते हैं तो हमारे शरीर को उस भोजन को पचने के लिए बार बार काम करना पड़ता। जिससे शरीर के जो बाकि काम होते है, जैसे शरीर में दिन भर में हुई टूट-फूट को हील करना, डैमेज सेल्स को रिपेयर करना, डेड सेल्स को  स्वास्थ्य कोशिका से रेप्लस या बदलना, के लिए शरीर को समय ही नहीं मिलता जिससे शरीर के अतिमहत्वपूर्ण काम ठीक से नहीं हो पाते।  और हम ८ घंटे सोने के बाद भी एनर्जेटिक महसूस नहीं करते। 

६ सुबह सूर्य उदय से पहले उठना चाहिए। जब हम सूर्य उदय से पहले उठते हैं तो हमारा शरीर और मन स्वास्थ्य और सकारत्मक ऊर्जा से भरा हुआ रहता  है।  और जिसकी वजह से हमारा वो दिन बहुत ही अच्छा और शानदार गुजरता  है। 

७ सुबह या शाम के समय नगें पैर घास में टहलना चाहिए।  जब हम नगें पैर घास में टहलते तो पृथ्वी का  ग्रेविटेशनल फाॅर्स या गुरत्वाकर्षण बल हमारे शरीर की सभी नेगेटिव एनर्जी या ऊर्जा खींच लेता है, और हम पॉजिटिव एनर्जी से भर जाते हैं। 

  हम सुबह या शाम या सोने से पहले मैत्री साधना कर सकते हैं। मैत्री साधना करने से हमारे मन में सभी प्राणियों के प्रति करुणा, प्रेम, स्नेह, उदारता, एवं  सकारात्मक विचार उत्पन्न होंगे।  जिससे हमारा मन शांत और खुश रह सकेगा। 

रोज व्यायाम या एक्सरसाइजेज करना चाहिए।  जब हम रोज व्यायाम करते हैं तो हमारा ब्लड सर्कुलेशन या खून का संचार ठीक से होता हैं।   शरीर में फुर्ती और तंदुरुस्ती रहती है। 

इस प्रकार हम कलयुग में जीवन जीने का अपना पुराना तरीका बदल कर निरोगी एवं खुशहाल रह सकते हैं। 

विषय - वस्तु का स्रोत: कलयुग में जीवन जीने का तरीका 

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